समस्याओं से समाधान की ओर! - एक खोज

समस्याओं से समाधान की ओर! - एक खोज
कोरोना महामारी की मार का अब दिखने लगा असर जैसे जैसे बाजार खुल रहे है वहीँ छोटे एवं मँझले दुकानदारों की परेशानिया भी बढ़ रही है। बहुत से व्यापारी है जो अपने पुराने धंधे या तो बदल रहे या बंद होने की कगार पर है। इसमे शिक्षण संस्थान स्कूल, कालेज, कोचिंग क्लासेज, मोबाइल शॉप्स, प्रिंटिंग प्रेस एवं अन्य दुकाने प्रभावित हुए है। इस महामारी में रोजगार एवं स्वरोजगार पुनः सुचार रूप में लाने , बेरोजगारी से लड़ने का डर सबको सता रहा है । इसका कारण समझने के लिए बाजार एवं आम जनता के बीच चर्चाओं के दौरान जानकरी मिली  कि - व्यापारी अपनी दुकान का 3 माह का किराया दे? 
या दुकान के लिए सामान की खरीददारी करे? या अपनी पुरानी उधारी को चुकता करे? या बिजली के 3 माह का बिल भरे? या अपने कर्मचारियों को पिछले 3 माह का वेतन दे? या नए कर्मचारियों की भर्ती करे? या बैंक की क़िस्त भरे? या अपने बच्चों के स्कूल की फीस भरे? या अपने घर के बिजली का बिल भरे। 
ऐसी स्थिति में बाजार खुल तो रहे है और कुछ दुकानदारों को  यह समस्या  का सामना करना पड़ रहा है।
यह मध्यम वर्ग की आम समस्या हो गई है। यह न तो किसी से कह सकता है और न सह सकता है। 
ऐसी स्थिति कब तक रहेगी इसका सही अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो रहा है। वही आम पब्लिक को भी महँगाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अब सवाल यह है कि. जहां पूरा विश्व ही इस समस्या से जूझ रहा है तो इस समस्या का क्या हल को सकता है? अब इस विषय पर नेता, सामाजिक संघटन, एनजीओ, शासन, प्रशासन, बड़े व्यापारी, छोटे व्यापारी, घरेलू महिलाओं, आम जनता,  श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर्स,    छात्रो , शिक्षकों, वार्ड मेम्बर, उद्योगपति,  सामाजिक कार्यकर्ता, प्रिंट मीडिया, वेब मीडिया सभी का विचारमंथन हो  जिसमें सभी से सुझाव एकत्र किए जाए  एवं समस्या के समाधान के लिए बिना किसी मतभेद-मनभेद से समाज मे  एक सामंजस्य किया जा सकता है।   
        यह एक विचारणीय एवं अनुकरणीय चर्चा का विषय हो सकता है? इस चर्चा के निष्कर्षों एवं समाधान से हम सब मिलकर  एक "अद्वितीय भारत" एक्सेल इंडिया की ओर एक कदम आगे बढ़ाकर  पूरे विश्व को पुनः सामान्य स्थिति में लाने का सफलतापूर्वक प्रयास कर सकते है।

एक्सेल इंडिया
अजय मालवीय



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